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Addressing Modes क्या होता है?
Addressing Mode वह तरीका होता है जिससे माइक्रोप्रोसेसर को यह पता चलता है कि data कहाँ रखा है और उसे कहाँ से लेना है।
दूसरे शब्दों में कहें तो, “Addressing Mode वह तरीका (method) होता है जिसके द्वारा Microprocessor में किसी instruction के अंदर operand (data) को specify किया जाता है।”
Addressing Mode इसलिए जरूरी होता है क्योंकि हर instruction को सही data पर काम करना होता है। अगर CPU को यह नहीं पता होगा कि data कहाँ है, तो वह सही operation को perform नहीं कर पाएगा। इसलिए Addressing Mode माइक्रोप्रोसेसर को बताता है कि data किस जगह से लेना है।
Types of Addressing Modes in Hindi (एड्रेसिंग मोड्स के प्रकार)
8085 Microprocessor में 5 प्रकार के Addressing Modes होते हैं:-

1. Immediate Addressing Mode
इस mode में, 8-bit या 16-bit डेटा सीधे instruction के अंदर ही दिया गया होता है। आपको डेटा कहीं और ढूँढने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
- यदि डेटा 16-bit का होता है, तब instruction 3 bytes की होती है।
- यदि डेटा 8-bit का होता है, तब instruction 2 bytes की होती है।
उदाहरण (Examples):
MVI B, 45H(इसका मतलब है डेटा 45H को सीधे Register B में move या load करना।)LXI H, 3050H(H-L Register Pair को 3050H डेटा के साथ तुरंत load करना।)
2. Register Addressing Mode
इस mode में, डेटा एक रजिस्टर से दूसरे रजिस्टर में copy होता है। इसमें रजिस्टर ही डेटा (Operand) का काम करते हैं और सारा ऑपरेशन माइक्रोप्रोसेसर के registers के बीच ही perform किया जाता है।
उदाहरण (Examples):
INR A(Register A के Content को 1 से बढ़ाना या Increment करना।)MOV A, B(Register B के Content को Register A में copy करना।)MOV A, C(Register C के Content को Register A में copy करना।)
3. Direct Addressing Mode
इस Mode में, जिस डेटा पर काम करना होता है उसका मेमोरी एड्रेस (Memory Location) सीधे instruction के अंदर ही दे दिया जाता है।
उदाहरण (Example):
LDA 5000H (इसका मतलब है कि मेमोरी एड्रेस 5000H पर जो भी डेटा मौजूद है, उसे Accumulator यानी Register A में copy करना।)
4. Indirect Addressing Mode
इस Addressing Mode में, डेटा का Address सीधे नहीं बताया जाता। बल्कि डेटा जिस मेमोरी लोकेशन पर स्थित होता है, उस address को ‘Register Pair’ (जैसे H-L Pair) के द्वारा दर्शाया या specify किया जाता है।
उदाहरण (Example):
MOV A, M (इसका मतलब है कि H-L Register Pair जिस मेमोरी एड्रेस को point कर रहा है, वहाँ से डेटा को Register A में ट्रांसफर करना।)
5. Implied (Implicit) Addressing Mode
इस mode में डेटा instruction में लिखा नहीं होता। बल्कि इसमें CPU खुद समझ जाता है कि किस data पर operation करना है।
उदाहरण (Examples):
CMA(Accumulator के डेटा को Complement करना।)RAR(Rotate Accumulator Right) औरRAL
Addressing Modes के फायदे
Addressing Modes के फायदे निम्नलिखित हैं:-
1. Instruction का साइज़ कम करना:- कुछ Addressing Modes (जैसे- Register Addressing Mode या Implied Mode) में हमें डेटा का पूरा Address देने की ज़रूरत नहीं पड़ती। इससे Instruction का साइज़ काफी कम हो जाता है, जिससे मेमोरी की बचत होती है।
2. प्रोग्रामिंग में लचीलापन (Flexibility):- अलग-अलग Addressing Modes प्रोग्रामर को डेटा एक्सेस करने के कई तरीके देते हैं। प्रोग्रामर अपनी ज़रूरत के हिसाब से तय कर सकता है कि उसे डेटा सीधा रजिस्टर से लेना है, मेमोरी से लेना है, या तुरंत (Immediate) देना है। इससे प्रोग्रामिंग बहुत आसान और लचीली हो जाती है।
3. मेमोरी का बेहतर उपयोग:- जब Instruction का साइज़ छोटा होता है, तो वह मेमोरी में कम जगह घेरता है। साथ ही, जब एड्रेसिंग मोड की मदद से डेटा जल्दी मिल जाता है, तो मेमोरी तक बार-बार जाने (Memory Fetch) का समय बचता है, जिससे कंप्यूटर की स्पीड बढ़ जाती है।
निवेदन:- मुझे आशा है कि Addressing Modes in Hindi का यह article आपके लिए उपयोगी रहा होगा। इसे अपने दोस्तों के साथ अवश्य share कीजिये और आपके जो भी Microprocessor 8085 को लेकर कोई questions है तो उन्हें comment करके जरुर पूछिए। धन्यवाद।