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Analog Sound in Hindi – एनालॉग साउंड क्या है?
- Analog Sound एक ऐसा साउंड है जो समय के अनुसार लगातार बदलते रहता है।
- एनालॉग साउंड लगातार समय के साथ बदलते रहता है इसलिए इसे निरंतर (continuous) sound भी कहा जाता है.
- Analog Sound को natural (प्राकृतिक) साउंड भी कहा जाता है क्योंकि प्रकृति में मौजूद सभी ध्वनिया एनालॉग साउंड का उदहारण है। उदहारण के लिए इंसानो का आपस में बातचीत करना , चिड़िया की आवाज , पेड़ों की ध्वनि आदि।
- एनालॉग साउंड को दर्शाने के लिए Sine Waves (साइन तरंगो) का इस्तेमाल किया जाता है।
- Analog Sound की निरंतर तरंगो को रिकॉर्ड के लिए एनालॉग रिकॉर्डिंग सिस्टम की आवश्यकता पड़ती है।
नीचे आपको Analog Sound का चित्र दिया गया है:-

Analog Sound की विशेषताएँ
Analog Sound की विशेषताएं निम्नलिखित होती हैं।
1. Continuous Signal
Analog signal लगातार बदलता रहता है। इसमें values के बीच कोई break नहीं होता।
2. Natural Sound
यह वास्तविक (real) आवाज़ के बहुत करीब होता है। पुराने tape recorder और radio इसी तकनीक का उपयोग करते थे।
3. Noise का प्रभाव अधिक
Analog signals में disturbance या noise जल्दी आ जाता है। इससे आवाज़ खराब या unclear हो सकती है।
4. Storage कठिन
Analog data को store करने के लिए ज्यादा memory की जरूरत पड़ती है।
Digital Sound in Hindi – डिजिटल साउंड क्या है?
- Digital Sound एक ऐसा साउंड है जो समय के अनुसार लगातार नहीं बदलता है.
- डिजिटल साउंड एक discrete (अनिरंतर) साउंड होता है. इसे बाइनरी (0,1) के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है.
- Digital Sound सभी डिजिटल डिवाइसों में मौजूद होता है। उदहारण के लिए- टीवी से आ रही ध्वनि एक डिजिटल साउंड है , आपके मोबाइल फ़ोन से आ रही ध्वनि एक डिजिटल साउंड है।
- डिजिटल साउंड का एक ऐसा साउंड है जिसका इस्तेमाल डिजिटल डिवाइसों जैसे (टीवी , रेडियो , स्मार्ट फ़ोन, कंप्यूटर , लेपटॉप आदि) में किया जाता है।
- Digital Sound को स्टोर करने के लिए ज्यादा मेमोरी स्पेस की आवश्यकता पड़ती है।
- इस साउंड को वर्गाकार तरंगो (square waves) के द्वारा दर्शाया जाता है।
नीचे आपको इसका चित्र दिया गया है:-

Digital Sound की विशेषताएँ
Digital sound की विशेषताएं निम्नलिखित होती हैं।
1. Binary Format
डिजिटल साउंड 0 और 1 के रूप में store होता है। इसलिए computer इसे आसानी से process कर सकता है।
2. Noise कम
Digital signal में noise का प्रभाव बहुत कम होता है। इससे आवाज़ ज्यादा clear सुनाई देती है।
3. Easy Storage
इसे mobile, computer, pen drive और cloud में आसानी से store किया जा सकता है।
4. Editing आसान
Digital audio को software की मदद से आसानी से edit किया जा सकता है।
Difference between Analog & Digital Sound in Hindi – एनालॉग और डिजिटल ध्वनि में अंतर
Analog Sound और Digital Sound के बीच के अंतर को हम नीचे दी गयी टेबल के आधार पर आसानी से समझ सकते हैं:-
| एनालॉग साउंड | डिजिटल साउंड |
|---|---|
| एनालॉग साउंड एक continuous (निरंतर) साउंड है क्योंकि यह साउंड समय के साथ लगातार बदलते रहता है. | डिजिटल साउंड एक discrete (अनिरंतर) साउंड है क्योंकि यह समय के साथ लगातार नहीं बदलता है. |
| एनालॉग साउंड में निरंतर तरंगे (continuous waves) होती है। | डिजिटल साउंड में अनिरंतर तरंगे (discrete waves) होती है। |
| इसे sine wave (साइन तरंग) के द्वारा दर्शाया जाता है. | इसे square wave (वर्गाकार तरंग) के द्वारा दर्शाया जाता है. |
| यह ध्वनि प्रकर्ति में मौजूद होती है। | यह ध्वनि डिजिटल डिवाइसों में मौजूद होती है। |
| एनालॉग साउंड का इस्तेमाल दुबारा करने पर इसकी क्वालिटी कम हो जाती है. | डिजिटल साउंड का इस्तेमाल दुबारा करने पर इसकी क्वालिटी कम नहीं होती. |
| एनालॉग साउंड एक तरंग के रूप में डेटा को एक स्थान से दुसरे स्थान में ट्रांसफर करता है। | डिजिटल साउंड बाइनरी रूप में डेटा को ट्रांसफर करता है। |
| इसके उदहारण :- मानव की आवाज, चिड़िया की आवाज, कुत्ते या बिल्ली की आवाज आदि। | इसके उदहारण :- कंप्यूटर की आवाज, मोबाइल फ़ोन की आवाज, टीवी की आवाज आदि। |
| इसका उपयोग केवल एनालॉग डिवाइसों जैसे (घड़ी, और स्टीम इंजन आदि) में किया जा सकता है। | इसका इस्तेमाल डिजिटल डिवाइसों जैसे (टीवी, मोबाइल, और कंप्यूटर आदि) में किया जा सकता है। |
| एनालॉग साउंड को डिजिटल साउंड में बदलने के लिए Analog to Digital Converter का इस्तेमाल किया जाता है. | डिजिटल साउंड को एनालॉग साउंड में बदलने के लिए Digital to Analog Converter का इस्तेमाल किया जाता है. |
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Exam में पूछे जाने वाले प्रश्न –
एनालॉग साउंड को बनाने के लिए माइक्रोफोन द्वारा रिकॉर्ड किया जाता है लेकिन डिजिटल साउंड को बनाने के लिए एनालॉग सिग्नल को डिजिटल सिग्नल में परिवर्तित किया जाता है। एनालॉग साउंड ध्वनि को रिकॉर्डिंग तकनीक के शुरुआती दिनों में बनाया गया था।
डिजिटल साउंड में बेहतर संचरण दर , शोर का कम प्रभाव, कम विरूपण होता है। वे कम खर्चीले और अधिक लचीले होते हैं। गुणवत्ता, संचरण की बेहतर दर और डिजिटल साउंड की कम खर्चीली प्रकृति इसे एनालॉग साउंड से बेहतर बनाती है।
Reference:- https://www.diffen.com/difference/Analog_vs_Digital
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