Paging in Hindi – पेजिंग क्या है?
ऑपरेटिंग सिस्टम में paging एक memory management scheme (मेमोरी मैनेजमेंट स्कीम) है, इसमें मेमोरी को fix size के पेजों में विभाजित किया जाता है।
दूसरे शब्दों में कहें तो, “Paging एक memory management तकनीक है, जिसका उपयोग operating system में memory को सही तरीके से manage करने के लिए किया जाता है।”
पेजिंग में physical memory और logical memory को छोटे-छोटे fixed-size के blocks में divide किया जाता है। Logical memory के blocks को pages कहते हैं, और physical memory के blocks को frames कहते हैं।
Paging का मुख्य उद्देश्य memory fragmentation की समस्या को कम करना और memory utilization को बेहतर करना है।
Paging में उस डेटा का प्रयोग किया जाता है जो main memory में नही होता है लेकिन वह डेटा pages के रूप में virtual memory में होता है.
Paging के द्वारा एक कंप्यूटर डेटा को main memory में प्रयोग करने के लिए secondary memory जैसे:-hard disk से स्टोर तथा retrieve करता है.
जब एक प्रोग्राम को पेज की आवश्यकता होती है तो पेज main memory में उपलब्ध होता है. (secondary memory से पेज main memory में store हो जाते है.)
Paging का प्रयोग डेटा को तेज गति से access करने के लिए किया जाता है.
नीचे दिए गये चित्र के द्वारा हम main memory में पेज चेक होने के flow को समझेंगे.
जहाँ p एक page नंबर है,
D एक offset एड्रेस है,
F एक frame एड्रेस है.

सबसे पहले सी.पी.यू. लॉजिकल एड्रेस generate करता है जिसके दो भाग होते है; पहला भाग page number होता है और दूसरा भाग offset होता है।
Page number का इस्तेमाल page table में index की तरह किया जाता है जो कि प्रत्येक पेज के base एड्रेस को contain किये रहता है . page number को इंडेक्स की तरह इस्तेमाल करके हम frame एड्रेस को खोजते है.
जब frame एड्रेस मिल जाता है तो offset को frame एड्रेस में add कर दिया जाता है और अंत में physical एड्रेस को generate कर लिया जाता है. इस physical एड्रेस को सी.पी.यू. को वापस execution के लिए भेज दिया जाता है.
पेजिंग के फायदे (Advantages of Paging)
- पेजिंग में मेमोरी को छोटे-छोटे fixed size के blocks (frames) में divide किया जाता है, जिससे external fragmentation नहीं होता।
- पेजिंग एक ही समय में बहुत सारें प्रोसेस को हैंडल करने में मदद करती है, जिससे मल्टीटास्किंग (Multitasking) संभव होती है।
- पेजिंग में लॉजिकल एड्रेस (Logical Address) और फिजिकल एड्रेस (Physical Address) अलग-अलग होते हैं, जिससे प्रोसेस को मेमोरी लोकेशन की जानकारी नहीं होती।
- पेजिंग बड़ी-बड़ी processes को छोटे pages में बांटकर मेमोरी में लाना आसान बनाती है।
पेजिंग के नुकसान (Disadvantages of Paging)
- पेजिंग में frame का साइज fix होने के कारण, अगर page का डेटा frame से छोटा हो, तो बाकी जगह खाली रह जाती है, जिसे internal fragmentation कहते हैं।
- इसमें हर प्रोसेस के लिए एक page table बनानी पड़ती है, जिसे maintain करने में अतिरिक्त मेमोरी और प्रोसेसिंग समय लगता है।
- इसमें page table को बार-बार एक्सेस करना पड़ता है, जिससे मेमोरी एक्सेस slow हो सकता है।
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Segmentation in Hindi – सेगमेंटेशन क्या है?
Segmentation भी एक memory management scheme है जिसमें मेमोरी को different size के segments में विभाजित किया जाता है.
दूसरे शब्दों में कहें तो, “Segmentation एक memory management तकनीक है, जिसका उपयोग operating system में processes को logical segments में divide करने के लिए किया जाता है।”
Segmentation का मुख्य उद्देश्य memory को logically divide करना और memory utilization को बेहतर करना है।
Segmentation में डेटा तथा प्रोग्राम logical address space में विभाजित हो जाते है जिससे मेमोरी को हम protect तथा share कर सकते है।
इसमें प्रत्येक segments की सूचना एक table में स्टोर होती है जिसे Global Descriptor Table (GDT) कहते है।
जो segmentation का मेमोरी मैनेजमेंट paging की तरह ही समान होता है, परन्तु segmentation में segments का आकार fix नही होता है जबकि paging में pages का आकार fix होता है।
Segmentation में logical address को दो parts में divide किया जाता है:-
- Segment Number (s): यह बताता है कि address किस segment में है।
- Offset (d): यह segment के अंदर data का एकदम सही location बताता है।

Segmentation के फायदे
- Program को logical parts में divide करने से memory allocation आसान हो जाती है।
- इसमें internal fragmentation नहीं होता।
- इसमें अलग-अलग segments के लिए अलग protection और access rights प्रदान किए जा सकते हैं।
- Program को segments में divide करने से debugging आसान हो जाती है।
Segmentation के नुकसान
- इसमें external fragmentation हो सकता है।
- इसमें Segment table को manage करना और memory allocation करना थोड़ा कठिन होता है।
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