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Software Maintenance in Hindi – सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस क्या है?
Software Maintenance वह प्रक्रिया है जिसमें उस सॉफ्टवेयर को सुधारने, बदलने (modify करने) और अपडेट करने का काम किया जाता है जिसे पहले से user को उपयोग करने के लिए दे दिया गया हो।
आसान शब्दों में: “Software Maintenance का मतलब है सॉफ्टवेयर को delivery के बाद लगातार सुधारना, update करना और बेहतर बनाना।”
जब कोई सॉफ्टवेयर बनाकर user को दे दिया जाता है, तब उसका काम खत्म नहीं होता। असल में, असली काम उसके बाद शुरू होता है, जिसे maintenance कहते हैं।
क्योंकि जब लोग उस सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं, तब कई तरह की समस्याएँ सामने आती हैं, जैसे:-
- software में bugs (गलतियाँ) आना
- कुछ features ठीक से काम न करना
- system slow हो जाना
- user की नई जरूरतें सामने आना
इन सभी समस्याओं को ठीक करने और सॉफ्टवेयर को बेहतर बनाने के लिए Software Maintenance किया जाता है।
Software maintenance जो है वह software development life cycle (SDLC) का part (भाग) होता है।
Need of Software Maintenance in Hindi (सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस की आवश्यकता)
Software Maintenance की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से होती है:-
- Errors और faults को correct करने के लिए
- Software के design को बेहतर बनाने के लिए
- New features (enhancements) जोड़ने के लिए
- System की efficiency (दक्षता) बढ़ाने के लिए
- Code को optimize करने के लिए
- Software components को modify करने के लिए
- Unwanted side effects को कम करने के लिए
- Hardware और software changes के अनुसार update करने के लिए
Types of Software Maintenance in Hindi – सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस के प्रकार
इसके प्रकार निम्नलिखित हैं:-
1:- Corrective Maintenance – इसमें उन bugs को fix किया जाता है जो users के द्वारा खोजे जाते है अर्थात् सॉफ्टवेयर को प्रयोग करते समय आने वाली problems को इसमें ठीक किया जाता है. और software की performance को भी बढाया जाता है.
2:- Adaptive Maintenance – इसमें सॉफ्टवेयर को update तथा modify तब किया जाता है जब सॉफ्टवेयर को किसी नए platform, या operating system में run करने की जरूरत पड़ती है. अर्थात इस maintenance में software को up to date रखा जाता है.
3:- Perfective Maintenance – इसमें सॉफ्टवेयर को लम्बे समय तक use करने लायक बनाने के लिए software को update तथा modify किया जाता है. इसमें user की आवश्यकता के आधार पर नए features को add किया जाता है. जिससे कि reliability और functionality को बेहतर किया जा सके.
4:- Preventive Maintenance – इसमें सॉफ्टवेयर को भविष्य में fail होने से बचाने के लिए update और modify किया जाता है. इसमें उन problems पर ध्यान दिया जाता है जो वर्तमान में उपस्थित नहीं होती है परन्तु भविष्य में घटित हो सकती है. इसमें reengineering & reverse engineering का concept सम्मिलित होता है.

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Hello sir mai Narendra bol rha hun PGDCA DR bhimrao ambedkar collage pamgarh se